What is Metaverse : इन्टरनेट का भविष्य, क्यों है ये इतना खास

बीते कुछ दिनों में मेटावेर्स की चर्चा काफी तेज़ है. इन्टरनेट की बड़ी कम्पनियां इसे तकनीक का भविष्य बता चुके हैं. वहीँ Facebook और Google जैसे नामी ब्रांड्स ने तो इस पर तेज़ी काम करना शुरू कर दिया है. इसके अलावा बड़ी कंपनियों ने भी खुद को इसके लिए तैयार कर रहे हैं. लेकिन कई लोगों के पास अब भी What is Metaverse और इसके खास होने से जुड़े सवाल हैं.

What Is Metaverse? आसान शब्दों में

जरा सोचिये, आपके पास एक ऐसी Technology है, जिसके मदद से आप अपने घर बैठे-बैठे डिजिटल दुनिया (Digital World) में घूम पाए. एक ऐसी दुनिया, जो बिलकुल काल्पनिक हो लेकिन उसके सारे काम असली हो. आप अपने घर में हों, लेकिन इस तकनीक के मदद से आप दूर बैठे किसी रिश्तेदार के साथ होने जैसा अनुभव ले पायेंगे. इसी डिजिटल दुनिया नाम Metaverse है.

आसन शब्दों में कहें तो मेटावेर्स, वास्तविक दुनिया के पैरलल एक ऐसी आभासी दुनिया होगी जहाँ आपकी अलग पहचान होगी. इस दुनिया में आप गेमिंग, शॉपिंग, दोस्तों और रिश्तेदारों से मिलने के अलावा आप व्यापार भी कर पाएंगे.

Facebook अब Meta कहलायेगा

Facebook ने अपना पूरा फोकस इसी पर रखा है. सोशल मीडिया की सबसे बड़ी कम्पनी, फेसबुक ने इस पर बिलियन डॉलर्स का निवेश किया है. वहीँ उसने अपना नाम बदल कर Meta रख दिया है. फेसबुक के CEO, मार्क जुकरबर्ग ने एक ऑनलाइन इवेंट कर के अपने कम्पनी का नया नाम बताया. साथ ही मेटावेर्स की संभावनाओं के बारे में भी बताया.

Mark Facebook Metaverse

मार्क के अनुसार, मेटावेर्स विडियो कालिंग और Virtual World से काफी आगे की चीज़ है. अब तक आप वर्चुअल दुनिया को केवल अपने फ़ोन, लैपटॉप और अन्य इलेक्ट्रॉनिक डिवाइसेस के स्क्रीन पर देखते हैं, वहीँ आप इस दुनिया में जा सकते हैं.

कैसे काम करेगा Metaverse?

न्यूज़ एजेंसी रायटर्स में छपी एक रिपोर्ट के अनुसार, Metaverse, AR यानि (Augmented Reality) और VR यानि (Virtual Reality) पर काम करेगा. इसके अलावा Blockchain, NFTs और Cryptocurrency के भी इसमें शामिल होने की बात की जा रही है. कुल मिलाकर कहें तो एक ऐसी दुनिया जहाँ खरीदने से बेचने तक सब कुछ उसी दुनिया में होगा. यहाँ तक पैसों का लें दें भी उसी दुनिया की करेंसी में होगा. इस तकनीक के इस्तेमाल मेडिकल, आर्किटेक्ट, और अन्य विज्ञान से जुडी चीजों में सहुलियत होगी!

मेटावेर्स शब्द क्यों?

मेटावेर्स कोई नया शब्द नही हैं. इसकी चर्चा सबसे पहले नील स्टीफैंसन की किताब Snow Crash में हुई थी. इसे साल 1992 में पब्लिश किया गया था. इसका मुख्य करेक्टर, एक पिज़्ज़ा डिलीवरी बॉय है जो ऐसी ही एक डिजिटल वर्ल्ड में रहता है. वह उसी डिजिटल वर्ल्ड में नए लोगों से मिलता है. इसके अलावा साल 2011 में आयी एक किताब Ready Player One में भी इस आभासी दुनिया के बारे में चर्चा की गयी है.

क्या एक Metaverse होगा या अधिक?

अब बड़ा सवाल ये उठता है की क्या हर कम्पनी अपना मेटावेर्स बनायेंगे या केवल एक ही Metaverse जो सभी कम्पनियों से इंटरकनेक्ट होगा. इस पर अभी कहना जल्दबाजी होगी! गूगल, फेसबुक, माइक्रोसॉफ्ट और अन्य गेमिंग कम्पनियाँ इस पर काम कर रही हैं. ज्यादातर कम्पनीयां एक metaverse वाले कांसेप्ट पर सहमत हैं लेकिन देखना दिलचस्प होगा कि वह साथ काम करने पर मानते हैं या नहीं. आने वाले इस तकनीक पर हर कंपनी सबसे आगे होने का हक़ चाहेगी.

कब तक तैयार होगा Metaverse?

तकनीक विषय पर काम करने वाली वेबसाइट सीनेट (CNET) में छपे एक रिपोर्ट की मानें तो इसमें काफी लम्बा समय लगेगा. इसके लिए काफी निवेश की भी जरूरत होगी जिसके लिए कम्पनियाँ काम कर रही हैं. वहीँ इसके लिए तकनीक को भी तेज़ी से डेवलप करने की जरूरत होगी.

5G Technology
File Photo

हम यहाँ एक काल्पनिक दुनिया की बात कर रहे हैं, जहाँ सब कुछ असली दुनिया के तरह चलता रहेगा. इसका मतलब हर सेकंड काफी सारा डाटा अपलोड और डाउनलोड होगा. इसके लिए हमें 5जी से भी आगे की तकनीक पर काम करने की भी आवश्यकता होगी. या फिर हमें 5जी की तकनीक को काफी बेहतर करना होगा. सब कुछ ठीक रहा तो इस तकनीक को आने में एक से दो दशक का समय लगेगा.

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